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Mihintale

मिहिंताले

Mihintale

अनुराधापुरा से 12 किमी पूर्व में एक पवित्र पर्वत शिखर, जिसे श्रीलंका में बौद्ध धर्म के जन्मस्थान के रूप में प्रतिष्ठित किया जाता है।

सिंहावलोकन

मिहिंटेल प्राचीन सीढ़ियों, स्तूपों, गुफाओं और मठ के खंडहरों से सुसज्जित पहाड़ियों का एक समूह है, जिसे उस स्थान के रूप में पवित्र माना जाता है जहां द्वीप पर बौद्ध धर्म की शुरुआत हुई थी। 1,840 ग्रेनाइट सीढ़ियों की एक भव्य उड़ान कंटाका सेतिया और अंबस्थला दगोबा से होते हुए शिखर तक चढ़ती है, जो आसपास के मैदानों का व्यापक दृश्य प्रस्तुत करती है। यह अनुराधापुरा से आधे दिन का आसान भ्रमण है और एक प्रमुख तीर्थस्थल है, खासकर पोसोन पोया पर।

इतिहास

इतिहास के अनुसार, भारतीय सम्राट अशोक के पुत्र, मिशनरी भिक्षु महिंदा ने 247 ईसा पूर्व में यहां राजा देवनमपिया तिस्सा से मुलाकात की और उन्हें बौद्ध धर्म में परिवर्तित कर दिया, यह घटना हर साल जून में पोसोन पूर्णिमा पर मनाई जाती है। यह पहाड़ी श्रीलंका के सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण मठ परिसरों में से एक बन गई, जिसमें इसके प्राचीन मठ के नियमों और बंदोबस्तों को दर्ज करने वाले शिलालेख हैं।

आकर्षण

मिहिंताले पवित्र पर्वत

वह पर्वत जहां बौद्ध धर्म श्रीलंका में लाया गया था, प्राचीन स्तूपों और मठों के खंडहरों के बीच से एक स्मारकीय सीढ़ी द्वारा पहुंचा गया था।

🕑 06:00–18:00
⏱ ~2.0 hr
🎟 प्रवेश: LKR 500

घटनाएँ एवं त्यौहार

Poson Poya at Mihintale

Religious · Every June, on the Poson full moon

Tens of thousands of white-clad pilgrims climb Mihintale's 1,840 steps to mark the arrival of Buddhism in Sri Lanka in 247 BC. Anuradhapura's stupas are wrapped in light and dansal stalls line every approach road.

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यात्रा युक्तियाँ

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